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ऑनलाइन चेटिंग में मिली (Online Chatting Mein Mili) Hindi Sex Story

Written By Jal Pari on Friday, 19 April 2013 | 22:01


प्रेषक : हेमन्त जैन

हेलो दोस्तो, आज मैं आप सबके सामने अपनी पहली सेक्स कहानी लिख रहा हूँ, कृपया मुझे प्रोत्साहन दें ताकि मैं और भी मज़ेदार कहानियाँ आपके सामने रखने की हिम्मत कर सकूँ।

मैं इंजिनियर हूँ और जॉब कर रहा हूँ।

बात है उस समय की जब मैं बारहवीं में पढ़ता था तब मुझे ऑनलाइन चेटिंग करने का बहुत शौक था। तब मैं ऐसे ही किसी चैट साइट पर चला गया तो मेरी एक लड़की से बात हुई जो कॉल सेंटर में जॉब करती थी, उसकी नाइट शिफ्ट थी तो वह सिर्फ़ सुबह 4-5 बजे ही ऑनलाइन आ सकती थी। तो मैं उसके लिए सवेरे सवेरे जाग कर ऑनलाइन आया करता था। अभी तक मैंने उसे देखा भी नहीं था। अचानक से एक दिन उसने कहा- चलो हम स्काईपी पे बात करते हैं।

यानि वीडिया चैट करते हैं।

मुझे तो उसे देखने की पहले ही जल्दी हो रही थी तो मैंने झट से हाँ बोल दी। जैसे ही मैंने उसे पहली बार देखा मेरे तो होश ही उड़ गये। दोस्तो क्या बताऊँ मैं आप लोगों को कि क्या हुस्न की परी थी वो ! और उसके बुब्बे तो जैसे कंप्यूटर से बाहर निकल कर मुझे बोल रहे हो कि दबा लो हमें !

उसका फिगर बिल्कुल 36-24-36 रहा होगा, रंग एकदम गोरा चिट्टा और बॉल एकदम सुनहरे ! कुल मिला कर उसने ऐसी खूबसूरती पाई थी कि किसी मुर्दे के सामने भी खड़ी हो जाए तो उसका भी खड़ा हो जाए।

अब हमारे मिलने का तय हुआ दिल्ली के एक ऐसी जगह जहाँ चुदाई का कार्यक्रम खुले आम चलता था। पहले हम लोग खूब घूमे और घूमते घूमते मैंने उसे सब जगह छुआ भी जिससे उसे कोई दिक्कत नहीं थी। तो मेरा भी मनोबल ऊँचा हो गया और मैं उसे पार्क में ले गया जहाँ हम दोनों लेट गये और बातें करने लगे।

बातों में ना उसे दिलचस्पी थी ना मुझे और हम दोनों एक दूसरे को बस छुए जा रहे थे तो मैंने उसे पूछा- क्या मैं तुम्हारे हाथ पर किस कर सकता हूँ?

तो उसे हाँ कर दी।

तो में हाथों से आगे बढ़ता हुआ उसके गालों तक पहुँच गया और उसने कोई असहमति नहीं जताई तो मेरा मनोबल और भी बढ़ गया और मैंने धीरे से उसके गालों को चूम लिया। उसकी साँसें बहुत तेज़ हो गई और वो भी अब मेरा साथ दे रही थी।

फिर मैंने उसकी गर्दन की साइड में काटा तो वो बहुत गरम हो चुकी थी और अपने बुब्बे खुद ही मसले जा रही थी। मैंने उसका हाथ हटाया और उसके बुब्बे ज़ोर ज़ोर से मसलने शुरू कर दिए और एक हाथ से उसकी चूत पर सहलाना भी शुरू कर दिया।

अब तो वह पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, मुझे बेतहाशा चूमे जा रही थी और मैं भी उसके बालों में हाथ फिरा फिरा कर उसकी गर्दन की साइड में बुरी तरह काट रहा था। मैं उसके होंठो को भी चूस चूस कर काट रहा था और उसकी चूत पर पेंटी के ऊपर से ही अपने हाथ फिरा रहा था।

फिर मैंने अचानक ही उसके बुब्बे ज़ोर से काट लिए और उसके चूत के दाने को पकड़ के दबा दिया तो वह उछल पड़ी और मेरा लंड पकड़ कर अपनी तरफ खींचने लगी।

बाद में जब हम दोनों को होश आया कि हम लोग पार्क में हैं तो हम दोनो ने कपड़े ठीक किए और वहाँ से अपने रूम में चले आए जहाँ हमने पहली बार चुदाई का खेल खेला। वहाँ आते आते रास्ते में ऑटो में हम लोगों ने खूब किस किया और मैंने उसके खूब बूब्स दबाए और उसे खूब गरम किया।

जैसे ही हम लोग रूम पर आए तो उसने झट से दरवाजा बंद किया और मेरे ऊपर चढ़ गई और मुझे बेतहाशा किस करने लगी। मैंने भी उसका पूरा साथ दिया और उसके बूब्स दबाते हुए बहुत किस किया और दूसरे हाथ से उसके पेंटी के उपर से ही उसकी चूत को खूब रगड़ा।

बाद में मैंने उसे बिस्तर पर पटक दिया और उसका टॉप उतार फेंका और उसके ब्रा के उपर से ही उसके बूब्स को खूब चूसा और दबाया। वो तब तक बहुत ही गरम हो चुकी थी तो नीचे सरक कर मैंने उसकी नाभि को उंगलियों से खूब सहलाया और बाद में उसे चूसा और काटा भी।

साथ साथ एक हाथ से उसके बूब्स को मसलता और दूसरे हाथ से उसकी चूत को खूब रगड़ता। फिर मैंने नीचे जाकर उसकी जीन्स भी उतार दी और उसकी जांघों को खूब मसला और उन्हें काट काट कर लाल कर दिया और फिर उसकी चूत को चूस चूस कर उसका सारा पानी निकाल दिया।

मैंने उसकी चूत को चाटते हुए उसके दाने के साथ बहुत खेला, उसे दबाया, मसला और ना जाने क्या क्या किया।

बाद में दोस्तो वो इतनी पागल हो गई कि एक सेकेंड भी नहीं रुक पा रही थी बिना चुदे तो मैंने उसे बहुत स्टाइल्स में चोदा और उसकी भूख शांत की।

मेरी कहानी आपको कैसी लगी मुझे मेल अवश्य करें। मेरी मेल आइडी है:
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बिन ब्याही कुंवारी दुल्हन की सुहागरात (Bin Byaahi Dulhan ki Suhagraat) Hindi Sex Story


प्रिय पाठको, यह मेरी सच्ची कहानी है, दस साल पुरानी बात है, मैं अमरावती में रहती थी, पापा और ममा नौकरी करते थे। मैं उनकी अकेली लाडली बेटी थी।

वे दफ़्तर चले जाते और मैं स्कूल ! शाम को हम घर आते, हमारा घर काफी बड़ा था इसलिये पापा ने सोचा कोई किरायेदार रख लेते हैं।

दो तीन दिन में ही एक युगल घर देखने के लिये आए, रेखा चाची और दिनेश चाचा... दोनों बहुत अच्छे थे, चाची की उम्र लगभग 25 थी और चाचा की लगभग 27 साल होगी। उनकी कोई संतान नहीं थी और वो मुझे बेटी जैसा ही समझते थे।

वे मुझे बहुत अच्छे लगते थे, चाची तो मुझे बस दूसरी माँ लगती क्योंकि जब भी ममा मुझे डाँटती तो वो मुझे लेकर अपने घर जाती, मेरी पसंद की चोकलेट और गुलाबजामुन देती। चाचा भी मुझे बहुत प्यार करते, कभी नहीं डाँटते !

मार्च 2003 की बात है, उन दिनों मेरी परीक्षा चल रही थी, पढ़ाई में मैं ठीक थी और पेपर भी अच्छे हो रहे थे, चाची मुझे घर आने के बाद खाना देती और पढ़ाई में भी मदद करती !

लेकिन अचानक एक शाम को फोन आया कि भोपाल में मेरे सगे चाचा अनिल एक दुर्घटना के शिकार हो गए हैं। योगिता चाची वहाँ अकेली हैं, पापा और ममा को जाना ही था, पर मेरा आखरी पेपर दो दिन बाद था, ममा और पापा परेशान थे, जाना जरुरी था और मुझे अकेला कैसे छोड़ें !

तभी रेखा चाची और दिनेश चाचा वहाँ आये और बोले- चिंता की कोई बात नहीं, हम श्रद्धा को सम्भाल लेंगे।

ममा पापा का टेन्शन कम हो गया। मैं बहुत खुश थी क्योंकि मुझे चाचा-चाची पापा–ममा से भी ज्यादा पसंद थे।

पापा-ममा आठ दस दिन के लिये चले गये।

मेरा आखरी पेपर था, चाची ने कहा- आज ठीक से लिखना, आखरी पेपर है। घर आने के बाद हम आईसक्रीम खाने जायेंगे और मैं तुम्हारे लिये गुलाबजामुन भी बनाऊँगी।

चाचा मुझे स्कूल छोड़ने गए और लेने के लिये भी आये। घर में चाची ने गुलाबजामुन बनाये थे, मैंने कई गुलाबजामुन खाये।

दोपहर में मैं चाची के पास लेटी तो चाची ने पूछा- पेपर कैसा रहा?

मैंने कहा- बहुत बढ़िया !

तभी चाची ने कहा- यह तो सिर्फ कागजी परीक्षा थी, तुम्हें जीवन की परीक्षा के बारे में पता है?

मैंने कहा- नहीं !

चाची ने कहा- ममा ने तुम्हें कुछ नहीं बताया?

मैंने कहा- नही !फिर चाची ने कहा- माहवारी के बारे में कुछ बताया?

मैंने कहा- हर महीने में मुझे बहुत तकलीफ होती है, लेकीन ममा ने इसके लिये कुछ भी नहीं बताया।

चाची ने कहा- तुम्हारी ममा बहुत व्यस्त रहती हैं, उन्हें पता ही नहीं कि बेटी कब जवान हो गई? लड़की को जीवन में बहुत सारी कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है जो अगर पता न हो तो पूरे जीवन में बहुत तकलीफ उठानी पड़ती है। अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें इसके बारे में आने वाले एक हफ़्ते में सब कुछ सिखा दूंगी और कोई फ़ीस भी नही लूँगी।

कुछ नया सिखने को मिलेगा, सोच कर मैं झट से मान गई।

फिर हम सो गये।

शाम को चाचा घर आये, चाची ने मुझे सब सिखाने की बात कही। मैंने भी चाचा को कहा- हाँ ! आप दोनों मुझे सिखा दें।

उन्होंने कहा- तुम अपने पापा और ममा को इसके बारे में कुछ नहीं बताओगी।

मैं मान गई। शाम को पाँच बजे चाची मुझे बाज़ार ले गई, वहाँ उन्होंने मेरे लिये शॉपिंग की पर ऐसी शॉपिंग ममा ने कभी नहीं की थी !चाची ने मेरे लिये काले रंग की सुंदर ब्रा और पैंटी खरीदी, वीट क्रीम और कुछ सौंदर्य प्रसाधन खरीदे। मुझे मेरी पसंद की ढेर सारी चोकलेट भी खरीद कर दी। मैं खुश थी।

छः बजे हम घर पहुँचे। बाहर धूप के कारण घर आकर चाची ने मुझे नहलाया और शरीर की सफाई के बारे में बहुत कुछ सिखाया। शाम सात बजे उन्होंने मुझे कहा- आगे जाकर मुझे लड़की के सारे काम सीखने पड़ेंगे।

नई ब्रा और पेंटी पहन कर मुझे थोड़ा अटपटा लग रहा था क्योंकि मैंने पहले कभी ब्रा पहनी ही नहीं थी और योनि के बाल साफ करने से थोड़ी खुजली भी हो रही थी। पर चाची ने वहाँ क्रीम लगाई।

तब लगभग साढ़े सात बजे चाची ने कहा- आज मैं तुम्हें जीवन का सबसे बड़ा पाठ सिखाऊँगी।

बाद में उन्होंने मेरी सुंदर तैयारी की, उनके शादी के खूबसूरत फोटो दिखाये और कहा- आज मैं तुम्हें दुल्हन बनाऊँगी।

मैं भी मान गई।

उन्होंने कहा- हम तुम्हारी विडियो भी बनाएँगे और तुम्हारी ममा को सरप्राइज देंगे।

बाद में उन्होंने मुझे उनका शादी का जोड़ा पहनाया, मेरी फोटो भी खींची, मुझे नजर ना लगे इसलिये काला तिल गाल पर लगाया।

मुझे मजा आ रहा था। बाद में चाची ने मुझे कहा- शादी पहली रात यानि 'सुहागरात' सबसे प्यारी होती है। हर लड़की इस रात के लिये तड़पती है। जिंदगी का सबसे बड़ा सुख इस दिन ही प्राप्त होता है।

उन्होंने मुझे कहा- क्या तुम वो आनन्द लेना चाहोगी? इसमें थोड़ा दर्द होता है पर मजा भी बहुत आता है। मैंने तो यह मजा तुम्हारी उम्र में ही कई बार चखा था और आज भी हर रात चख रही हूँ।

मैंने तुरंत हाँ कर दी। सुहागरात में दुल्हन किस तरह बैठती है, कैसे अपने पति को बादाम का दूध पिलाती है, फिर कैसे शर्माती है, ये सब बताया और यह भी कहा- आज इसका प्रैक्टीकल भी तुम से करवाऊँगी।

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था।

फ़िर उन्होंने कमरा सजाया, कमरे में इत्तर छिड़का। शादी के जोड़े में मुझे बड़ी गर्मी लग रही थी लेकिन मैं चुप रही क्योंकि मुझे कुछ नया सीखना था।

बाद में उन्होंने मुझे बेडरूम में पलंग पर घूंघट लेकर बिठाया।

थोडी देर में वहाँ चाचा आ गये, उन्होंने भी उनके शादी के कपड़े पहने थे। आज वो बहुत ही अलग लग रहे थे। तभी सुंदर नाइटी में उनके साथ कैमरा लेकर चाची भी पहुँची और मुझे बोली- यह तुम्हारी पहली सुहागरात है अपने पति (चाचा) और गुरु (चाची) के पैर छुओ।

मैं कपड़े सम्भाल कर पलंग से नीचे उतरी और चाचा के पैर छुए।

उन्होंने मुझे मुँह दिखाई के तौर पर 500 रुपये दिये। मैं खुश हो गई, फ़िर मैंने चाची के पैर छुए। उन्होंने आशीर्वाद दिया- ऐसी रात तुम्हारी जिंदगी में हर रोज आये !

और चुपके से मेरी चुम्मी ली और मेरे हाथ में तीन गोलियाँ देकर कहा- यह छोटी गोली तुम्हें बड़ी सहायता करेगी, इसे दूध के साथ ले लो और दूसरी गोली तुम्हें उत्तेजना प्रदान करेगी, तीसरी गोली तुम्हें दर्द नहीं होने देगी।

चाची की दी हुई गोलियाँ मैंने बिना कुछ कहे दूध के साथ ले ली और पलंग पर घूंघट लेकर बैठ गई।

चाचा जी ने फिर मुझे प्यार से सहलाया मेरे बदन में मानो बिजली दौड़ गई। चाची जी ने सामने कैमरा लगा दिया। घूंघट के कारण कुछ दिख नहीं रहा था। चाचा चाची बात कर रहे थे, हंस रहे थे- फ़ूल सी गुड़िया है धीरे करना, वैसे मैंने गर्भ निरोधक गोली और पेन किलर भी दे दी है।

चाचा ने अपने कपड़े उतार दिये और वो अंडर वियर में आ गये। धीरे से उन्होंने मेरा घूँघट खोला और उनके मुँह से शब्द निकल पड़े- बहुत सुंदर !

मैं सहम गई और आंखें बंद कर ली। उन्होंने मुझे बड़े प्यार से चूमा। पहले मेरे गालों को बाद में माथे को ! मेरी बिंदी हटा दी, कान के बूंदे और गले का मंगल सूत्र भी निकाल कर रख दिया।

उसके बाद उन्होंने चाची को मेरी नथ निकालने को कहा। वे हंसी और बड़े प्यार से नथ निकाल दी।

धीरे धीरे वो मेरे पूरे बदन को छू रहे थे, मुझे गुदगुदी हो रही थी।

फ़िर उन्होंने मुझे खड़ा किया और मेरा घागरा खोल दिया। घागरा भारी होने से नीचे चला गया। मैंने पकड़ने की कोशिश की पर चाची ने मेरे हाथ पकड़ लिये।

फ़िर उन्होंने मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और मैं थोड़ी चिल्लाई।

पर चाची ने कहा- चुप रहो, विडियो बन रहा है।

अब मैं केवल ब्रा और पेंटी में खड़ी थी और मैने मेरा मुँह हाथ से ढक लिया। मुझे लज्जा आ रही थी पर गोली की वजह से उत्तेजना भी हो रही थी।

चाचा ने मुझे बाहों में भर लिया और जोर से दबाया। उससे मेरे चुचूक उनके सीने से रगड़ गये। चाची रसोई से बाऊल में गुलाबजामुन लाये और एक गुलाब जामुन मेरे मुँह में दे दिया। चाचा ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और एक झटके में मेरी पेंटी निकाल फेंकी।

मैं डर गई।

तभी चाची ने और एक गुलाबजामुन मुँह में खिलाते हुए मेरी ब्रा निकाल फेंकी। अब चाचा मेरी चूत को चाट रहे थे और चाची मेरे चुचूक चूस रही थी।

चाची कह रही थी- ऐसा ही होता है सुहागरात में ! चुप रहो और मजे लो।

चाचा की जीभ मेरी योनि में जाती तो मैं मजे से तड़प उठती। अब चाचा ने मेरे दोनों पैर ऊपर उठाये और चाची ने गुलाबजामुन का रस मेरी योनि में डाल दिया।

बहुत गुदगुदी हुई। फिर चाचा ने अपनी जीभ से वो रस चाट चाट कर चूस लिया। बाद में चाची ने दो गुलाबजामुन मेरी कड़क चूचियों में फंसा दिये और चाचा ने वो पूरी उत्तेजना से चूस कर खाये। इसमें मेरे चुचूक पर उनके दांत भी गड़ गये।

चाची ने कहा- गोली खाई है तो दर्द कम होगा।

अब चाची ने मुझे नीचे उतार कर बैठने को कहा और चाचा पलंग पर बैठ गये।

अब उन्होंने कहा- आज मैं तुम्हे लिंग चूसना सिखाती हूँ। और उन्होंने चाचाजी का लिंग अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी। उन्होंने मुझे वैसा ही करने को कहा पर मैंने मना कर दिया।

तब उन्होंने चाचा के लिंग पर ढेर सारा चॉकलेट लगा दिया और कहा- इसे लोलीपोप समझकर चूसो ! बड़ा मजा आयेगा।

मैं मान गई क्योंकि मुझे चोकलेट पसंद थी।

चूसते-चूसते चोकलेट का स्वाद बदल रहा था। अब वो लिंग बहुत बड़ा हो गया था और चाचा मेरे बाल पकड़ कर उसे अंदर तक मेरे गले तक डाल रहे थे। मुझे सांस लेना मुश्किल हो रहा था।

चाची मेरे चुचूक चूस रही थी।

चाचा ने कहा- मैं झड़ने वाला हूँ।

चाची ने कहा- अंदर ही झड़ जाओ।

और जोर से कुछ मलाई जैसी चीज मेरे मुँह में भर गई, वो मेरे गले तक पहुँची। मुझे ऐसा लगा कि मैं उलटी कर दूंगी पर चाची जी ने मुझे वो उगलने नहीं दिया और कहा- यह अमृत है पगली ! गिरा मत ! पी ले !

और मेरा मुँह ऊँचा करके ढेर सारा गुलाबजामुन का रस मुँह में डाल दिया, मैंने वो रस पूरा निगल लिया।

अब चाची ने मुझे कहा- अब तुम्हारी अंतिम परीक्षा है। इसमें तुम्हे पास होना ही है, नहीं तो जिंदगी बरबाद है।

तब चाचा फिर से खड़े हुये। वो हंस रहे थे।

चाची ने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरे दोनों पैर दूर-दूर कर दिये। अब उन्होंने भी अपने कपड़े उतार दिये।

उनके वक्ष बहुत बड़े और सुडौल थे। मेरे पैर हिले नहीं इसलिये उन्होंने उनको पलंग के दोनों पैरों से पेटीकोट के नाड़े से बाँध दिए।

अब दोनों पैरों में काफी अंतर था। अब वे मेरे सर की तरफ से आई और कहा- यह अंतिम परीक्षा है ! इसे जरूर पास करना श्रद्धा !

और उन्होंने उनके और मेरे वक्ष पर ढेर सारी आईसक्रीम लगा दी और कहा- बेटी, तुम मेरे चुचूक चूसना और मैं तुम्हारे !

अब यह सिलसिला शुरू होते ही चाचाजी ने अपना लिंग मेरी योनि में धकेला, मुझे थोड़ा दर्द हुआ और मैंने चाची के चुचूक को काट लिया।

चाची ने चाचा से कहा- धीरे !

और चाची ने भी प्यार से मेरे चुचूक को काट लिया और हंसी, अब चाचा को इशारा किया और उन्होंने मेरे होंठों को अपने होंठों से चिपका दिया।

अब चाचा ने एक जोर का धक्का दिया तो उनका बड़ा लिंग मेरी योनि को चीरता हुआ अंदर चला गया।

मैं जोर से चिल्लाई पर चाची ने अपने मुँह में मेरी आवाज दबा दी। मैं दर्द से तड़प रही थी।

तभी चाची ने थोड़ी बरफ मेरे शरीर पर रखी और मेरे उरोजों को सहलाने लगी और कहा- बेटी, तुम्हें माहवारी में हर महीने जिस काँटे से तकलीफ होती थी वो काँटा चाचा ने निकाल दिया है। अब तुम्हें कभी तकलीफ नहीं होगी।

और उन्होंने मुझे चादर पर गिरा खून भी दिखाया और कहा- यही वो गंदा खून है जो हर महीने तुम्हें तकलीफ देता था। अब थोड़ा और सह लो, सब ठीक हो जायेगा।

बाद में उन्होंने चाचा के लिंग पर ढेर सारी क्रीम लगाई और कहा- इस क्रीम को तुम्हारे अन्दर लगा कर ये तुम्हारा इलाज कर देंगे, चिंता मत करो।

अब उन्होंने मुझे घोड़ी जैसा बैठने को कहा ताकि मलहम ठीक से लगे।

अब चाचा ने धीरे धीरे अपना लिंग अंदर डालना शुरू किया और मेरे नीचे लटकते स्तनों को चाची ने सहलाना शुरू रखा। अब मुझे दर्द कम लग रहा था और मजा आ रहा था।

बाद में चाचा नीचे लेट गये और चाची ने मुझे उनके लिंग पर बैठाकर ऊपर-नीचे होने को कहा।

वे कह रही थी कि आज तुम जी भर कर झूला झूल लो, कल का क्या पता?

फिर चाचा ने मुझे एक बार लिंग चूसने को कहा। इस बार मैं खुद मान गई और लोलीपोप जैसे उनका लिंग चूसने लगी, चाची प्यार से मेरे बाल सहला रही थी।

अब चाची ने कहा- यह तुम्हारी परीक्षा का अंतिम चरण है।

तब फिर एक बार चाचा ने जोर जोर से मुझे चोदना शुरू किया, अब मैं भी उनका साथ दे रही थी।

अंत में मैं थक गई और मुझे चक्कर आने लगे। तभी चाची ने मेरे मुँह पर ठण्डा पानी मार कर कहा- अंतिम परीक्षा में अगर फेल तो सब खत्म !

मैं जाग गई और जोर जोर से चिल्ला कर उनका लिंग अंदर ले रही थी। मेरे स्तन फ़ूल गये थे, मैं आवाज कर रही थी और एकदम से मैं झड़ गई, पर चाचा रुकने वाले नहीं थे, उन्होंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और चाची से कहा- मेरा निकलने वाला है ! क्या करूँ?

चाची ने कहा- अंदर छोड़ दो, मैंने गोली दे दी है।चाचा ने अपना गरम गरम वीर्य जोर से मेरे अंदर छोड़ दिया। मैं एकदम से अकड़ गई, मुझे बड़ी ही संतुष्टि मिली।

फ़िर हम सो गये।

मैं रात भर सोई। सवेरे 11 बजे मेरे नींद खुली तो देखा चाची मेरे बगल में दूध का ग्लास लेकर बैठी हैं। उन्होंने मुझे नहालाया, दूध पिलाया।

मुझे चलने में जरा दिक्कत लगी तो उन्होंने मुझे थाम लिया और कहा- पहले ऐसा ही होता है, आज शाम को हम गार्डन जायेंगे।

आज से मेरे लिये वो गुरु थी, उन्होंने मुझे बडा आनन्द दिया था। दोपहर में उन्होंने मुझे कहा- तुम्हारे लिये एक सरप्राइज है।

और उन्होंने कम्प्यूटर पर मेरी सुहागरात की विडियो लगा दी। मैं शरमा गई लेकिन हम दोनों ने वो बहुत एन्जोय की।बाद में उन्होंने मुझे कई काम की बातें बताईं जैसे सच्चा सुख कैसे प्राप्त करें, कंडोम कैसे लगायें और कई सारे सेक्स के प्रकार और आसन... दस दिनों तक चाचा चाची मुझे यह आनन्द देते रहे। फिर पापा ममा आ गये। लेकिन मैं फिर भी उनके घर जाती थी। दो साल बाद चाचा की बदली हो गई पुणे में।

आज भी मैं वो विडियो देख कर उनको याद करती हूँ।

आप मुझे अपने विचार जरूर लिखें, आपके विचार मेरे लिये बहुमूल्य हैं।
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पूजा दीदी की सील (Pooja Didi ki Seal) Hindi Sex Story

Written By Jal Pari on Wednesday, 3 April 2013 | 15:33


प्रेषक : नेक्स राय

मेरा नाम रणबीर है, उमर 21 साल, रोपड़, पंजाब का रहने वाला हूँ ! बात उन दिनों की है जब मैं अप्रैल में बारहवीं के पेपर देकर मामा जी के पास नंगल गया। मेरे मामाजी की बड़ी लड़की पूजा की शादी तय हुई थी 28 जून की। तो मुझे दो महीने वहीं रहने के लिए कहा गया।

घर में बहुत काम रहता था ! शादी की तैयारियाँ जोरों से चल रही थी। पूजा मुझसे बड़ी थी इसलिए मैं उसे पूजा दीदी कह कर बुलाता था। पूजा दिखने में तो जैसे परी थी ! गोरा रंग, गोल-गोल मम्मे और स्लिम फिगर !

जो उसे देखता, बस देखता ही रह जाता था ! पूजा बहुत ही देसी लड़की थी लेकिन बिना कोई फ़ैशन किये भी वो हिरोइन लगती थी !

पूजा मेरे साथ बहुत ही घुलमिल कर रहती थी ! हम दोनों अक्सर देर रात तक अकेले गप्पें मारते रहते !

पूजा दीदी के बारे में अपने दिल की एक बात बताऊँ ! तो वो मुझे बहुत अच्छी लगती थी पर उसे कभी गलत विचार से नहीं देखा था मैंने !

एक दिन अचानक नानाजी की तबियत बहुत ख़राब हो गई! उन्हें चंडीगढ़ पी जी आई ले जाना पड़ा ! घर में पूजा अकेली रह रही थी ! मामा जी ने मुझे भी पूजा के साथ रुकने को कहा, वे बोले- रणबीर बेटे, हम तेरे नानाजी को चंडीगढ़ ले जाते हैं, तू पूजा बेटी के साथ घर में रह !

मैंने कहा- ठीक है मामा जी ! आप निश्चिन्त रहें !

अब हम दोनों भाई बहनों को कोई काम तो था नहीं, तो तय हुआ कि मूवी देखते हैं।

टेलीविज़न ओन किया तो बेकार बेकार फिल्म चल रही थी !

मैंने कहा- दीदी इंग्लिश फिल्म देखते हैं, हिंदी तो सारी बेकार आ रही हैं !

पूजा दीदी बोली- जैसा तुम्हें अच्छा लगे, लगा लो।

मैंने जी इंग्लिश ओन किया ! वहाँ जो मूवी लगी हुई थी उसमें चुम्बन-दृश्य चल रहा था! मुझे शर्म सी आने लगी क्योंकि दीदी से मैं कभी ऐसी वैसी बात नही करता था और मैंने झट से चैनल बदल दिया !

दीदी बोली- वही पीछे वाला चैनल लगा ! मुझे देखना है कि वो कैसे कर रहे हैं !

मैंने कहा- दीदी, यह इंग्लिश फिल्मों में होता है !

वो बोली- तुम लगाओ तो सही !

मैंने फिर से वही चैनल लगा दिया ! इतने में फिल्म में नायक-नायिका एक दूसरे को चाटने लगे और कपड़े खोल कर चूमने लगे ! इसके बाद सीन फ्लशबैक में चला गया !

दीदी बोली- यह सब कैसे करते होंगे ये लोग सबके सामने?

मैं बोला- आजकल तो यह सब भारत में भी होने लगा है !

दीदी बोली- एक बात पूछूं?

मैंने कहा- पूछो !

दीदी बोली- तुम मुझे किस करोगे क्या? मुझे भी देखना है कि किस करके कैसा लगता है !

मेरे तो जैसे होश उड़ गये ! पर मैं मुस्कुराने लगा और बोला- दीदी, मैंने कभी किस नही किया, मुझे नहीं पता कि किस कैसे करते हैं।

दीदी बोली- मुझे भी नहीं पता, आज देखते हैं करके !

मैं दीदी के पास जाकर बैठ गया ! दीदी ने मुझे अपनी बाँहों में ले लिया ! वैसा ही सीन बन गया जैसे कि फिल्म में चल रहा था ! मैंने भी दीदी को बाँहों में ले लिया और उसके होंठों को चूमने लगा ! लगभग 5 मिनट तक हम एक दूसरे को चूमते रहे !

एकदम दीदी बोली- रणबीर, अब बस करो ! मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है।

मैं समझ गया कि दीदी गर्म होने लगी है, मैंने कहा- दीदी, मुझे आपसे किस करके बहुत अच्छा लग रहा है ! और करूँ ?

वो कुछ नहीं बोली ! मैंने फिर से उसे चूमना शुरू कर दिया ! मैं समझ गया कि वो चुदवाने के मूड में है। मैंने हिम्मत करके अपना एक हाथ उसके मम्मों पर रख दिया !

वो कुछ नहीं बोली तो मेरी हिम्मत और भी बढ़ गई ! मैं उसके दोनों मम्मे दबाने लगा ! उसके मुंह से सिसकारियाँ निकलने लगी !

मैंने धीरे से दीदी की कुर्ती ऊपर उठाई और मम्मे चूसने लगा !

दीदी के कुछ भी न बोलने पर मैंने कहा- दीदी, यह कुर्ती उतार दो न प्लीज़ !

वो बोली- रणबीर मुझे डर लग रहा है, किसी को पता चल गया तो?

मैं बोला- दीदी कुछ नहीं होगा, किसी को पता नहीं चलेगा।

वो मान गई !

उसके मम्मों के बारे में क्या बताऊँ ! एकदम गोल और दूध की तरह सफ़ेद ! मैं उसके मम्मे चूस रहा था और वो सिसकारियाँ ले रही थी !

मैंने अपना हाथ उसकी सलवार में डाला तो उसकी फुद्दी एकदम गीली हो चुकी थी ! मैंने धीरे से उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया तो वो बोली- देख रणबीर, हम जो कर रहे हैं, यह गलत है। अब बस करो !

मैं बोला- दीदी, जब हमने इतना कुछ कर लिया तो अब गलत-सही की बात क्या रह गई?

दीदी बोली- रणबीर, ठीक है ! लकिन यह बात किसी को पता नहीं लगनी चाहिए।

अब दीदी मेरे सामने बिल्कुल नंगी पड़ी थी ! लगभग 15 मिनट की चूमाचाटी के बाद मैंने अपनी पैंट उतारी और अपना छः इंच का लन निकाला तो वो बोली- इतना बड़ा होता है लड़कों का लन?

मैंने कहा- इसे तुम्हारी फुद्दी में डालूंगा।

दीदी बोली- बाप रे ! मुझे मारना है क्या !!??

मैं बोला- तुम एक बार डलवाओ तो सही, तुम्हें पता भी नहीं चलेगा कि यह कहाँ गया।

वो हंसने लगी और मेरे लन को हाथ में पकड़ कर सहलाने लगी !

मैंने दीदी को सोफे पर लिटाया और अपना लंड उसकी फुद्दी में पेलने लगा ! वो दर्द से चिल्लाने लगी ! मैं जोर से झटके मारने लगा।

दीदी बोली- बस कर, बहुत दर्द हो रहा है।

लेकिन मैं कहाँ सुनने वाला था ! अभी 2-3 मिनट हुए थे कि मेरा सारा जोश दीदी की फुद्दी में निकल गया ! मैं हांफता हुआ दीदी के ऊपर गिर गया !

दीदी की सील टूट गई थी !

जब एक मिनट के बाद मैं उठा तो देखा दीदी कि फुद्दी से खून निकल रहा है !

दीदी बोली- तूने तो मार ही दिया था आज मुझे ! देख कितना खून निकल रहा है !

मैं बोला- दीदी, पहली बार ऐसा होता है, फिर सब ठीक हो जाता है। आओ, फिर से करते हैं ! इस बार तुम्हें बहुत मजा आएगा क्योंकि मैंने भी पहली बार किया, इसलिए जल्दी हो गया।

लेकिन पूजा दीदी मना करने लगी। लेकिन थोड़ी देर में मैंने उसे फिर से मना लिया ! अब दूसरी बार हम फिर सेक्स के लिए तैयार थे।

इस बार मैंने जल्दी नहीं की और आराम से उसे चोदने लगा। दूसरी चुदाई लगभग दो घंटे तक चली। इस बार पूजा दीदी को भी बहुत मज़ा आया। दीदी की फुद्दी से बहुत खून भी निकला बाद में, लेकिन सुबह तक सब सामान्य हो गया।

दूसरे दिन हम दोनों ने फिर चुदाई कि ! लेकिन उसके बाद कभी मौका नहीं मिला। दो महीने बाद दीदी की शादी हो गई। वो अब भी मुझे बहुत याद करती है !

यह मेरी सच्ची कहानी है !

आप दोस्तों को कैसी लगी, मुझे मेल जरूर करना !
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भारती दीदी (Bharti Didi) Hindi Sex Story


प्रेषक : भारती बेरी

मेरा नाम राजेश है, और सभी कहानियाँ पढ़ चुका हूँ। मैं अपनी कहानी कई दिनों से आपसे कहने की कोशिश कर रहा था सो आज लिख रहा हूँ।

मैं एक अच्छे घर-परिवार से हूँ। मेरी उम्र 25 साल, कद 6 फीट, मेरे लिंग की लम्बाई 6.5 ईंच और मोटाई 1.5 ईंच है। मेरे घर में मेरे अलावा माँ और एक बड़ी बहन भारती हैं जिसकी उम्र 30 साल हैं। वो बहुत ही फेशनेबल है। मेरी दीदी की फिगर 24-36-24 बहुत ही मस्त हैं उसकी चूचियाँ भी मस्त बड़ी हैं। बड़ी दीदी की शादी कुछ चार साल पहले हुई थी पर अब वो विधवा हो गई हैं।

मुझे मेरी दीदी बचपन से ही बहुत चाहती थी क्यूंकि मैं घर में सबसे छोटा हूँ। हम दोनो एक ही कमरे में सोते थे और दीदी के 20 साल की होने तक तो हम एक ही बेड प़र सोते थे।

प़र एक दिन माँ ने हमे अलग-अलग बिस्तर प़र सोने को कहा। मैंने हमेशा से ही दीदी को चोदने की सोची थी और रात को दीदी के सोते समय उनकी चूचियाँ और चूत कभी कभी दबा लेता था। प़र डर के कारण आगे कुछ नहीं कर पाता था। हाँ, बाथरूम में मुठ ज़रूर मार लेता था। दीदी को चोदने को मेरा बहुत मन करता था।

अब भारती दीदी वापस आ गई थी। सो मैं रोज उससे अच्छी अच्छी बातें करने लगा ताकि दीदी को किसी पुरानी घटना की याद न आये।

एक दिन भारती दीदी बाथरूम से नहाकर आ रही थी तो अचानक मेरी नज़र उन पर पड़ गई, शायद बाथरूम में तौलिया नहीं था, वो गीले बदन पर गाउन पहने थी। भारती दीदी के कपड़े शरीर से चिपके हुऐ थे और वो बहुत ही सुन्दर लग रही थी।

उस दिन फिर से मैंने मुठ मारी।

हम दोनों हमेशा कंप्यूटर प़र गेम और चैट करते रहते थे। एक दिन दीदी साथ वाले कमरे में सो रही थी। मैंने कंप्यूटर प़र जानबूझ कर sex की एक कहानी 'दीदी की चुदाई' पढ़नी शुरू की। अचानक दीदी पास आकर बैठ गई और उसने वो कहानी पढ़ ली उसने मुझसे कहा- तुम यह सब पढ़ते हो क्या?

मैं चुपचाप उनको देखने लगा। मैंने मौका देख कर उसके होठों पर चूम लिया। भारती दीदी ने मुझे पकड़ कर अलग कर दिया और कहा- मार खाएगा तू !

और दीदी वहाँ से उठ कर जाने लगी। जाते समय मेरी तरफ देख रहस्यमयी मुस्कान दी। मैंने भी मुस्कुराते हुए दीदी की तरफ देखा।

थोड़ी देर में दीदी ने मुझे आवाज़ दी और सोने के लिए कहा। मैं सोने आ गया। बातों बातों में दीदी ने मुझे sex कहानी के बारे में मुझे पूछा। मैने भी सब बता दिया।दीदी ने मेरी तरफ देखा, मैंने मौका देख कर फ़िर उसके होठों पर चूम लिया। भारती दीदी ने मुझे पकड़ कर अलग करने की कोशिश की लेकिन मैंने उन्हें छोड़ा नहीं और चूमता रहा।

मैं भारती दीदी के होठों को अपने होठों से चिपका कर चूमे जा रहा था, वो बेतहाशा पागल हो रही थी।

फिर मैंने दीदी के स्तनों की तरफ हाथ बढ़ाया। दीदी के स्तनों अग्र भाग को अपनी उँगलियों से चुटकियों से पकड़ कर गोल गोल घुमाया तो दीदी सिसिया उठी। मैंने दीदी के चुचूक पकड़ लिए थे। उनके चुचूकों को जोर से मींसा तो दीदी फिर से सिसिया उठी, मगर दर्द से। दीदी के चुचूक तन गए थे, जो ब्रा में उभर आये थे। मैंने उन पर अपनी उँगलियों के पोर को गोल गोल नचाते हुए छेड़ा, इसी बीच मैंने दीदी का गाउन उतार कर फेंक दिया। दीदी के कोमल गौर-बदन की एक झलक देखने को मिली।

अन्दर दीदी ने काले रंग की ब्रा पहन रखी थी। दीदी ने अन्दर सफ़ेद रंग की पैंटी पहनी थी। मैंने जिंदगी में पहली बार किसी लड़की को इस रूप में देखा था। भारती दीदी का पूरा शरीर जैसे किसी सांचे में ढाल कर बनाया गया था। काली ब्रा में उनके शरीर की कांति और भी बढ़ गई थी। ब्रा के अन्दर दीदी के बड़े बड़े स्तन कैद थे, जो बाहर आने को बेकरार लग रहे थे। मैंने ब्रा के स्ट्रेप को कंधे से नीचे उतार कर स्तनों को ब्रा की कैद से पूरी तरह आजाद कर दिया। भारती दीदी को नग्न देख कर मेरी हालत खराब हो गई। मैंने कभी किसी के स्तनों को छूकर नहीं देखा था फिर से बड़ी बुरी तरह उन्हें मसला।

फिर दीदी ने मेरी टी-शर्ट को ऊपर की ओर उठा दिया। दीदी ने अपने हाथों से मेरा अंडरवियर उतार दिया, फिर लिंग को पकड़ लिया। भारती दीदी मेरे लिंग को देखकर आश्चर्यचकित रह गई। दीदी ने लिंग को प्यार से सहलाया। दीदी के हाथ के स्पर्श से ही लिंग में कसाव बढ़ गया। दीदी ने मुस्कुराते हुए मुझको को चूमा। फिर दीदी तुरंत उसे चूसने लगी। दीदी को इस तरह से करते हुए देख मजा आ रहा था। दीदी ने बाकी लिंग को बाहर से चाट चाट कर चूसा तो मैं भी उत्तेजना से कांप गया।

मैंने उनकी जांघों के ठीक बीच में अपना हाथ फिराया और दीदी की पैंटी की इलास्टिक में उँगलियाँ फंसा कर पैंटी को उतार लिया और हाथों से हल्के हल्के दीदी के योनि प्रदेश को सहलाने लगा तो दीदी गुदगुदी के मारे उत्तेजित हो रही थी।

कुछ देर बाद भारती दीदी बहुत ही उत्तेजित हो गई थी हम दोनों ही अब काफी उत्तेजित हो गए थे। अब मैं दीदी की टांगों को फैला कर खुद बीच में लेट गया। मैंने भारती दीदी की योनि को सहलाया, उनके चूत की खुशबू मस्त थी। फिर उस पर पास में पड़ी बोतल से वैसेलिन निकाल कर लगाई। भारती दीदी की चूत का छेद काफी छोटा था। मुझे लगा कि मेरी प्यारी भारती दीदी मेरे लण्ड के वार से कहीं मर न जाये।

दीदी उत्तेजना के मारे पागल हो रही थी। दीदी ने मुझे लण्ड अन्दर डालने के लिए कहा।

भारती दीदी की योनि को अच्छी तरह से वैसेलिन लगाने के बाद फिर से दीदी की टांगों के बीच बैठ गया। मैंने दीदी की कमर को अपने मजबूत हाथों से पकड़ लिया। मैंने कोशिश करके थोड़ा सा लिंग अन्दर प्रवेश करा दिया। दीदी हल्के हल्के सिसकारियाँ ले रही थी। फिर मैंने एक जोरदार झटका मारकर लिंग को काफी अन्दर तक योनि की गहराई तक अन्दर पहुँचा दिया कि दीदी की चीख निकल गई।

मैंने दीदी के चेहरे को देखा तो मैं समझ गया कि दीदी को दर्द हो रहा है। मैंने दोबारा वैसा ही झटका मारा, तो दीदी इस बार दर्द से दोहरी हो गई। मैंने यह देख कर उनके होठों पर चूम लिया वरना दीदी की आवाज़ दूर तक जाती।

दीदी एक मिनट में ही सामान्य नज़र आने लगी क्योंकि उनके मुँह से हल्की हल्की उत्तेजक सिसकारियाँ निकल रही थी। मैंने फिर से एक जबरदस्त धक्का मारा, दीदी इस बार दहाड़ मार कर चीख पड़ी। मैंने देखा कि इस बार दीदी की आँखों में आँसू तक आ गए थे। मैंने दीदी के होठों को अपने होठों से चिपका लिया और जोर-जोर से उन्हें चूमने लगा और साथ ही दीदी के स्तनों को दबाने लगा। दीदी भी उतनी तेजी से मुझे चूम रही थी।

मैं हल्के हल्के अपनी कमर चला रहा था। अब दीदी धीरे धीरे सामान्य होती लग रही थी। मुझे इतना समझ आया कि जब दीदी को दर्द कम हो रहा है। दीदी ने अपने टांगों को मेरी कमर के चारों ओर कस लिया। मैंने ने दीदी के होठों को छोड़ दिया और पूछा- अब मज़ा आ रहा है क्या ? दर्द तो नहीं है ?

दीदी बोली- आराम से करते रहो ! मैंने एक जोरदार झटका मारकर अपना लिंग दीदी की योनि में काफी अन्दर तक ठूंस दिया। इस बार दीदी के मुँह से उफ़ भी नहीं निकली बल्कि वो आह.. सी.. स्स्स्स...सस... की आवाज़ें निकाल रही थी।

दीदी बोली- मुझे बहुत अच्छा लग रहा है !

यह देखकर तीन चार जोरदार शॉट मारे और लिंग जड़ तक दीदी की योनि में घुसा दिया और अपने होठों को दीदी के होठों से चिपका उनके ऊपर चित्त लेटा रहा।

अब झटकों की गति और गहराई दोनों ही बढ़ा दी। आधे घंटे त़क दीदी के रास्ते में मैं दौड़ लगाता रहा फिर दीदी ने अपनी टाँगें ढीली कर ली। दीदी स्खलित हो गई थी। कुछ ही देर में मेरा शरीर ढीला हो गया। काफी देर मैं दीदी के ऊपर लेटा रहा। दीदी मेरे होठों को बार बार चूम रही थी और आत्मसंतुष्टि के भाव के साथ मुस्कुरा रही थी। मैंने दीदी के कामरस को खूब पिया उन्होंने मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत में चिपका दिया था। भारती दीदी को रात में 3 बार चोदा। हर रात मजा कर रहा हूँ।

मेरी कहानी के बारे में बतायें।
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भाभी के साथ होली (Bhabhi ke Sath Holi) Hindi Sex Story


प्रेषक : राज
आपने मेरी पहली सच्ची कहानी पढ़ी होगी जिसमे मैंने पहली बार अपनी चाची की चुदाई की थी उसके बाद पिछले 13 सालों से उसे चोदता आ रहा हूँ,जिसके वजह से मुझे सेक्स की आदत ही पड़ गई यानि मैं पूरा चुदक्कड़ बन गया !
उसके बाद मैं जिसे भी देखता उसको चोदने के बारे में ही सोचता ! वैसे हमारा खानदान बड़ा होने की वजह से मेरी करीब 14 भाभियाँ थी और तीन सेक्सी चाचियाँ भी थी। वैसे सभी एक नंबर की माल थी और मैं सभी को चोदने के तरीके ढूंढ रहा था लेकिन कोई हाथ नहीं आ रही थी। मैंने मेरी चाची को जैसे चोदा था (रात को साथ में सोने के बाद गर्म करके चोदने का तरीका) वही तरीका मुझे बेहद पसंद है लेकिन वो मौका मुझे इनके साथ मिल नहीं रहा था, अब नया तरीका सोच रहा था !
साल 2004 में मैं अमरावती में जॉब करता था लेकिन कोई भी ऐसा त्यौहार नहीं रहा कि मैं गाँव में नहीं जाता था।
ऐसे ही मैं होली के त्यौहार के लिए गाँव गया हुआ था। रंगपंचमी की दिन सुबह उठा और मुँह-हाथ धोकर दोस्तों के साथ खेत में दारू पीने और रंग खेलने चले गया। दारू पीने के बाद धीरे धीरे नशा बढ़ने लगा और बातों बातों में दोस्तों ने चुदाई के किस्से सुनाने चालू किये जिससे मेरा लंड खड़ा होने लगा और मेरे दिमाग में चाची को चोदने की इच्छा हुई और वहाँ से उठ कर मैं वापस घर आ गया।
मैं चाची के यहाँ गया और चाची को चूमने लगा तो उसने बोला- अभी नहीं, घर पर सब लोग हैं, रात को जितनी मर्जी, उतना चोद लेना !
और मुझे उसने बाहर जाने के लिए बोला।
मैं बाहर तो निकल गया लेकिन मेरा लंड अभी भी तना हुआ था,बार-बार मुझे चोदने की इच्छा हो रही थी !
मैं चुपचाप ऐसे ही बैठा हुआ था कि मेरे दिमाग में भाभियों को रंग लगाने की बात आ गई और मैं उठ कर एक-एक करके सबको रंग लगाने निकला ! अभी तक मेरा लंड वैसे ही हिचकोले मार रहा था।
मैंने सोचा कि रंग लगाने के बहाने से भाभियों को छूने का मौका तो मिल ही जायेगा और मैंने एक-एक के घर में जाकर रंग लगाना चालू किया। उस समय हर किसी के घर में कोई न कोई मौजूद था जैसे किसी का पति तो किसी के सास-ससुर और यह देख के मेरा दिमाग और ज्यादा ख़राब हो रहा था क्योकि मेरे लंड को ठंडक नहीं मिल रही थी।
अब मैं अपने चचेरे भाई के यहाँ जा रहा था उसकी अभी तीन महीने पहले शादी हुई थी, उसकी बीवी यानि मेरी भाभी का नाम अरुणा था वो दिखने में थोड़ी सांवली थी मगर बदन को देखा तो किसी का भी लंड खड़ा हो जाये। उसका बदन 34-30-36 था, उसके चूचे तो दीवाना कर देते थे वैसे ही जब से उनकी शादी हुई थी तब से ही मैं उसको चोदने के लिए बेताब था।
उनके घर में उन दोनों के शिवाय कोई नहीं रहता था क्योंकि मेरे भाई के माता-पिता का देहांत हो चुका था। मैं अभी भी नशे में था लेकिन होश में था और यही सोच कर उसके घर जा रहा था आज मेरा भाई घर में न हो। मैं उनके घर के दरवाजे पर पहुँचा और सीधा अन्दर चले गया तब भाभी खाना बना रही थी। वो मुझे देखते ही समझ गई कि मैं उनको रंग लगाने के लिए आया हूँ।
भाभी बोली- अरे देवर जी, आप कब आये अमरावती से?
मैं बोला- कल शाम को आया भाभी ! अभी मैं आपको रंग लगाने आया हूँ।
वो बोली- मैं समझ गई थी कि आप होली खेलने के लिए आये हो लेकिन थोड़ा रुको, मुझे सब्जी का तड़का लगाने दो।
मैंने उनसे मेरे भाई के बारे पूछा तो वो बोली- आज कंपनी में काम होने की वजह से वो ड्यूटी पर गए हैं, शाम को 6 बजे आयेंगे।
वैसे ही मेरे दिमाग में ख्याल आया कि आज भाभी को तो चोदने का अच्छा मौका मिल गया है। देखते ही मेरा लंड फिर से तन गया और मेरे बरमुडे से बाहर निकलने लगा।
आज वैसे भी मैं बेफिक्र था क्योंकि अगर भाभी को बुरा लगा तो परिवार वालों को लगेगा कि दारू के नशे में रंग लगते वक़्त गलती से हाथ लग गया होगा।
उनके घर में दो कमरे थे, एक में मैं खड़ा था और दूसरे में वो खाना बना रही थी, उसी कमरे में उनका बेड भी था।
अब मैं उनके अन्दर के कमरे में चले गया और बेड पर बैठा उनके वक्ष को घूर रहा था।
क्या हसीन नजारा था, दो उभारों के बीच में पूरी खाई दिख रही थी। उसने लाल साड़ी और काला ब्लाऊज पहना था।
मैं धीरे धीरे अपने लंड को दबा रहा था, उतने में उनका ध्यान मेरी तरफ गया और मैंने फटाक से अपना हाथ अपने लंड से हटा लिया। उन्होंने ये सब देख लिया और अनदेखा करके सब्जी बनाने लगी।
वो मेरे से तीन साल से छोटी थी लेकिन रिश्ते में भाभी होने की वजह से मैं उनको आप आप कहता था।
फिर 5 मिनट के बाद वो वहाँ से उठी बोली- अब आप रंग लगा लो।
मैं उनके पास गया और पीछे से दोनों हाथों से उनके चेहरे पर रंग लगाना चालू किया।
अभी मैं उनके शरीर से दूर ही था, धीरे से मैंने अपना लंड उनके गांड से चिपकाया और जोर जोर से उनको रंग लगाना चालू किया जिससे उसको लंड के धक्के समझ में नहीं आ रहे थे।
मेरा दिमाग दूर का सोच रहा था कि अब समय बर्बाद करने में मतलब नहीं और ऐसा मौका शायद मिले।
मैं अपना मुँह नीचे करके उनके गर्दन के पास लाया और अपने होठों से उसको चूमने लगा तो वो एकदम चकरा गई कि यह क्या हो रहा है।
वो बोलने लगी- देवर जी बस हो गया रंग लगाना, अब छोड़ो !
लेकिन मैं कहाँ रुकने वाला था, मैंने फिर से कस कर उनको पकड़ लिया और गर्दन और पीठ की चूमना चालू किया। साथ में पीछे से लंड भी गांड को ठोक रहा था !
अब मैंने उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया जिससे उसका ब्लाउज पूरा खुला हो गया। वो ना-नुकुर करने लगी...प्लीज छोड़ो ना... कोई आ जायेगा...प्लीज...
मैं यह सुनते ही समझ गया कि भाभी को यह सब अच्छा लग रहा है लेकिन वो डर रही है।
मैंने उनकी बातों को अनसुना करके अपने दोनों हाथों से ब्लाऊज के ऊपर से स्तन दबाना शुरु किया।
वाह ! क्या सख्त चूचे थे.... बहुत अच्छा लग रहा था ! अभी तक मैंने सिर्फ अपने चाची के ही चूचे दबाये थे जो बहुत ही नर्म थे !
अब मैं जोर जोर से स्तन दबा रहा था। वैसे ही भाभी की आवाज तेज हो रही थी वो सिसकारियाँ मार रही थी उसकी धड़कन भी तेज हो गई थी...आ...आ...हु...हु...आह्ह्ह.. ह्ह्ह....
अब मुझे पूरा यकीन हो गया था कि अब भाभी गरम हो गई है। मैंने उनका हाथ पीछे लेकर अपने लंड पर रख दिया अब वो मेरा लंड सहला रही थी और बीच-बीच में दबा भी रही थी।
और मैं दोनों हाथों से उसके स्तन दबा रहा था !
मैंने उनका ब्लाउज खोलना शुरु किया और खोलते ही उनकी काली ब्रा दिखने लगी, मैंने ब्रा के ऊपर से दबाना चालू रखा।
भाभी बोली- देवर जी, जो भी करना है कर लो लेकिन दरवाजा तो बंद करो !
और मैं उनको छोड़ कर दरवाजा बंद करने गया।
दरवाजा बंद करने के बाद मैंने उनकी पूरी साड़ी उतार दी और अपना बरमूडा भी उतार दिया। अब मेरे शरीर पर चड्डी और शर्ट के शिवाय कुछ नहीं था और उसके शरीर पर सिर्फ ब्रा, चड्डी और पेटीकोट ही था !
हम दोनों ने एक दूसरे को बाँहों में भर लिया और होठों को चूमना शुरु किया, साथ साथ में मैं उसकी गर्दन की भी पप्पी ले रहा था।
मुझे मालूम है कि औरत के गर्दन के पास चूमा तो वो जल्दी गर्म होती है ऐसा मुझे मेरी चाची ने बताया था।
मैंने अपने हाथों से उसके ब्रा के हुक भी खोल दिए और उसे निकाल कर बेड पर फेंक दिया ! ब्रा खोलते ही उसके बड़े बड़े चूचे मेरे सीने से चिपक गए। मैंने उसको थोड़ा सा दूर किया और हाथों से उनको दबाना चालू किया। उसकी निप्पल बहुत ही छोटी और गुलाबी रंग की थी !
उसने भी अपना एक हाथ मेरे चड्डी में डाल दिया और मेरे 6" के लंड को सहलाने लगी। थोड़ी देर मसलने के बाद मैंने उसकी एक एक करके दोनों चूचियों को मुंह से चुसना चालू किया, मैं जैसे जैसे चूसता वैसे वैसे वो मेरा लंड और जोरों से दबाती।
अब हम दोनों बिस्तर पर चले गए और 69 की अवस्था में हो गए। मैंने उनका पेटीकोट पूरा ऊपर कर लिया और उनके पैरों को चूमने लगा ! वो भी मेरे पैरों को चूमने लगी। पैर चूमते चूमते अब मैं उसकी चूत तक पहुँच गया, उस पर सिर्फ चड्डी ही थी। मैंने चड्डी के ऊपर से उसकी चूत सहलानी शुरु किया तो वो अपने पाँव खींचने लगी।
मैंने जबरदस्ती से उसके दोनों पावों को फैला कर उसके चूत को अपने मुँह से चूमना शुरु किया तो वो अपने हाथों से मुझे धकेलने लगी।
अब मैंने उसकी चड्डी को नीचे सरकाना शुरु किया और कुछ ही सेकंडों में उसकी चूत को पूरा खुला कर दिया।
क्या चूत थी भाभी की ! एक भी बाल नहीं था, पूरी चिकनी चूत थी !
उसी अवस्था में मैं उसके शरीर के ऊपर हो गया और अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटने की कोशिश करने लगा, चूत गीली हो गई थी !
वो भी मेरा लंड चड्डी से ही हिला रही थी, मैं जैसे जैसे उसकी चूत चाट रहा था, वैसे वैसे उसकी आवाज में बदल हो रहा था।
वो बोलने लगी- प्लीज... ऐसा मत करो... गुदगुदी हो रही है !
मैंने उसको बोला- भाभी आप भी मेरा लंड चूसो ना !
वो बोली- नहीं बाबा, मुझे यह सब गन्दा लगता है।
लेकिन मेरी विनती से उसने चड्डी से ही मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया।अब मैंने एक उंगली उसके चूत में डाल दी और अन्दर-बाहर करने लगा। उसकी चूत बड़ी कसी थी लेकिन गीली होने की वजह से उंगली आराम से जा रही थी। कुछ देर अन्दर-बाहर करने के बाद उसकी सिसकारियाँ बढ़ने लगी।
उसने मेरी चड्डी उतार दी और मेरा लंड देखते ही वो खुश हो गई, बोली- आपका लंड तो बहुत ही बड़ा है, आपके भाई तो इससे भी छोटा और पतला है !
उसने अपने पेटीकोट से मेरा लंड पौंछा और उसे चूमना शुरु किया।
धीरे धीरे उसकी इच्छा उसे चाटने की भी हुई लेकिन वो थोड़ा ही चाट पाई !
इधर मैं जोर-जोर से उंगली अन्दर बाहर कर रहा था ! अब उसको सहन नहीं हो रहा था तो वो बोली- अब जल्दी से इसे मेरी चूत में डाल दो नहीं तो अगर कोई घर पर आ गया तो मेरी चूत ऐसे ही प्यासी रह जाएगी !
मैंने भी वक़्त की नजाकत को समझा और उसे चोदने का मन बना लिया। शायद कोई आता तो मेरा भी लंड प्यासा का प्यासा ही रहता !
मुझे चाची के साथ सेक्स करते करते बहुत सारे आसन मालूम थे फिर भी मैंने भाभी को पूछा- आपको कौन से आसन में चुदवाना पसंद है?
तो वो बोली- आप जिसमें चोदोगे वो चलेगा बस अब चोदना चालू करो !
और मैंने उनको अपने ऊपर लेकर अपने लंड पर उसकी चूत को रखा और एक झटके के साथ उसे नीचे अपने लंड पर दबाया तो वो चिल्ला उठी- वोह्ह्ह्ह....वोह्ह्ह....बहुत दर्द हो रहा है ...
वो तड़फ रही थी- प्लीज निकालो बाहर ! नहीं तो मेरी चूत फट जाएगी।
लेकिन मैंने उसे पकड़ कर रखा था, अभी भी मेरा लंड उसकी चूत में था, कुछ सेकंड रुकने के बाद मैंने उसे अपने सीने पर झुका लिया और लंड को अन्दर-बाहर करने लगा। अब उसको थोड़ा-थोड़ा दर्द हो रहा था। लेकिन उसे आनन्द भी आ रहा था, साथ में उसके होठों को भी चूम रहा था। फिर धीरे धीरे मैंने स्पीड भी बढाई और जोर-जोर से चोदने लगा।
अब वो भी अपनी गांड हिलाने लगी और अन्दर-बाहर करने लगी। ऐसा हमने करीब 5 मिनट किया।
उसके बाद मैंने उसे घोड़ी बनाया और जोरदार धक्के के साथ अपना पूरा 6" का लंड उसकी चूत में डाल दिया।
वैसे ही वो चिल्ला उठी- अरे बाप रे ....मार डालोगे क्या?
अब मैंने धीरे धीरे अन्दर-बाहर करना शुरु किया, अपने दोनों हाथों से उसके स्तन दबाना भी चालू रखा। इतने में वो झड़ गई। अब मुझे भी लग रहा था कि मैं जल्दी झड़ जाऊँगा तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई और तुरंत दो मिनट के बाद मैं भी झड़ गया और अपना पूरा पानी भाभी की चूत में छोड़ दिया।
अब भाभी के चेहरे पर ख़ुशी साफ झलक रही थी। हमने अपने अपने कपड़े पहने और दरवाजा खोल दिया।
मैंने भाभी को बताया- मैं दस दिनों की छुट्टियों पर आया हूँ !
उसने भी मुझे बताया की मेरे भाई की अगले 7 दिन नाईट ड्यूटी है !
हमने तय किया कि रोज रात को 11 से सुबह के 4 बजे तक यही रासलीलायें खेलेंगे और एक चुम्बन के साथ मैं वहाँ से निकल गया।
अगले 7 दिन मैं ऐसे ही भाभी को चोदता रहा रोज रात को हम 3-4 बार सेक्स करते रहे और १० दिन के बाद मैं फिर से अपने ड्यूटी पर चला गया। भाभी को चोदने की बात सिर्फ मेरी चाची को ही मालूम है।
कुछ दिन के बाद भाभी का एक दिन फ़ोन आया कि वो माँ बनने वाली है, उसको 2005 में जनवरी में लड़की हुई।
अब कभी कभी जब मैं गाँव को जाता हूँ तो मौका मिलते ही भाभी को चोदे बगेर रहता नहीं !
अब उसको मेरा लंड चूसने से परहेज नहीं है और बड़े प्यार से पूरा लंड मुँह में लेकर चूसती है !
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ट्यूशन टीचर (Tuition Teacher) Hindi Sex Story


लेखिका : रोमा शर्मा

आप सबने मेरी कहानियाँ

'मेरे साथ पहली बार' और 'मेरे अंकल'

पढ़ी, उनके लिए मुझे बहुत सारे मेल भी आये, मुझे बहुत अच्छा लगा पर मैं सबके मेल का जवाब नहीं दे पाई उसके लिए मैं माफी चाहती हूँ।

एक बार फिर मैं आपके सामने अपनी एक बहुत ही हसीन आपबीती लेकर उपस्थित हुई हूँ, आशा करती हूँ कि आप लोगों को पसंद आएगी।

यह घटना लगभग छः महीने पहले की है तब मैं एक कोचिंग में ट्यूशन के लिए जाती थी, वहाँ एक टीचर थे मयंक, जो मुझे काफी पसन्द करते थे और मैं भी उन्हें पसन्द करती थी, मैं उन्हें मयंक सर कहा करती थी।

कोचिंग स्कूल मेरे घर से काफी दूर था इसलिए मैं अपनी स्कूटी से जाती थी।

एक दिन मेरी कुछ किताबें कोचिंग में ही छुट गई और मैं घर आ गई। घर आने के बाद मुझे लगा कि शायद मेरी किताबें कोचिंग में ही रह गई हैं।

अगले दिन जब मैं ट्यूशन के लिए कोचिंग गई, तो वहाँ मुझे मयंक सर ने कहा- रोमा, कल तुम अपनी किताबें कोचिंग में ही भूल गई थी, वो मेरे पास हैं, पर मैं भी उन्हें घर भूल आया हूँ, तुम मेरे साथ घर चल कर अपनी किताबें ले लेना।

मैंने कहा- ठीक है सर !

उस दिन कोचिंग में मेरी क्लास जल्दी छुट गई, सर ने मुझे कहा- चलो रोमा, घर चल कर अपनी बुक्स ले लो !

मैं सर के साथ उनके घर चली गई।

सर के घर में कोई नहीं था मैंने सर से कहा- क्या आप अकेले रहते हैं?

तो उन्होंने कहा- नहीं, पापा मम्मी भी हैं, पर वे अभी एक रिश्तेदार के यहाँ शादी में गये हुए हैं।

सर ने कहा- रोमा, बैठो, मैं तुम्हारे लिए कॉफी लेकर आता हूँ।

मैंने कहा- सर, आप मुझे मेरी बुक्स दे दो, मुझे घर जाना है।

तो सर ने कहा- चली जाना रोमा, पर कॉफ़ी तो पी लो ! और वैसे भी आज क्लास जल्दी ही छूट गई है।

थोड़ी ही देर में सर ने कॉफ़ी लेकर आ गये, मुझे कॉफ़ी दी और मेरे ही पास बैठ गये, मुझसे कहने लगे- रोमा, अगर तुम्हें स्टडी में कोई भी प्रोब्लम हो तो तुम मेरे घर आकर मुझसे पूछ लिया करो !

मैंने कह दिया- ठीक है !

इतने में वो अपने पैर से मेरे पैर को सहलाने लगे। मैंने कॉफ़ी पी और कहा- अब मुझे जाना है सर, आप बुक्स दे दीजिए।

उन्होंने मेरी पुस्तकें दी और मैं आने लगी तो सर ने मुझे पीछे से आकर मेरे बूब्स पकड़ लिए और दबाने लगे।

मैंने कहा- यह क्या कर रहे हो सर आप?

इतने में उन्होंने मुझे अपनी तरफ किया और मेरे होंटों को चूमने लगे। मैं भी तो यही चाहती थी तो मैं सर का साथ देने लगी और उनके होंटों को चूमने लगी।

सर ने मुझे वहीं सोफे पर लिटा दिया और मेरे उरोज दबाने लगे। इतने में मेरे मोबाइल में मेरे घर से फ़ोन आया तो मैंने अपने आप को सर की बाहों में से छुड़ाया और कहा- अभी मुझे घर जाना है, घर से फ़ोन आया है।

सर कहने लगे- प्लीज़ रोमा, थोड़ी देर रुक जाओ, फिर चली जाना।

मैंने कहा- नहीं सर, अभी मुझे जाना है। फिर कभी करेंगे।

अगले दिन जब मैं फिर कोचिंग गई तो क्लास छूटने के बाद सर ने मुझे कहा- रोमा, कल तुम्हारी बहुत याद आई यार !

और सर ने मुझे एक गिफ्ट दिया तो मैंने उनसे कहा- इसमें क्या है?

तो उन्होंने कहा- इसे तुम घर जाकर अकेले में खोलना !

और कहा- क्या हम लोग इस संडे को मिल सकते हैं?

मैंने हाँ कर दी और कहा- सर, बताइए तो इसमें है क्या?

तो उन्होंने कहा- प्लीज़ रोमा, तुम इसे घर में अकेले में खोलकर देख लेना।

मैं उस गिफ्ट को लेकर घर आई और अपने कमरे में जाकर दरवाजे को लॉक करके उस गिफ्ट को खोलने लगी।

उसमें बहुत ही सुन्दर काले रंग की ब्रा और पेंटी थी और उसमें एक लैटर था, उसमें लिखा था- रोमा, संडे को तुम यही ब्रा और पेंटी पहन कर आना ! मुझे अच्छा लगेगा।

कुछ देर बाद सर का फ़ोन आया, उन्होंने कहा- रोमा गिफ्ट कैसा लगा?

मैंने कहा- बहुत अच्छा है, पर आप एक बात बताओ कि आपको कैसे पता कि मैं किस साइज़ की ब्रा और पेंटी पहनती हूँ?

तो सर ने कहा- कल जब तुम मेरी बाहों में थी तो पता लगा लिया था कि तुमको किस साइज़ की ब्रा और पेंटी आएगी।

मैंने कहा- आप बिल्कुल सही आकार की ब्रा-पैन्टी लाए हैं।

फिर सर ने कहा- रोमा, तो इतवार का प्रोग्राम पक्का ना? मैं तुम्हारा इन्तजार करूँगा !

मैंने हाँ कर दी।

आखिर संडे आ गया, मैंने नहा कर वही ब्रा और पेंटी पहन ली और फिर अपनी जींस और टीशर्ट पहन कर मैं सर के घर पहुँची।

मैंने दरवाजे की घंटी बजाई तो सर ने दरवाजा खोला। वो लोअर और बनियान में थे, उन्होंने कहा- आ जाओ रोमा अन्दर ! मैं तुम्हारा ही इन्तजार कर रहा था।

मैं अन्दर जाकर सोफे पर बैठ गई।

सर भी मेरे पास आ कर बैठ गये और कहने लगे- रोमा, मुझे तुमको कुछ दिखाना है ! क्या तुम देखना चाहोगी?

मैंने कहा- हाँ जरूर देखूँगी !

तो सर दूसरे कमरे में गये और अपना लेपटोप लेकर आये, उसे चालू कर उसमें एक वीडियो चला दिया। उस विडियो में एक चुदाई का सीन चल रहा था।

मैं वो विडियो देखने लगी, सर मेरी जांघ पर हाथ फिराने लगे और कहा- रोमा मैंने जो तुम्हें गिफ्ट दिया था, आज तुमने वही पहना है ना?

मैंने कहा- हाँ, आज मैंने वही ब्रा और पेंटी पहनी है।

मैं वो विडियो देखकर गर्म होने लगी थी।

फिर सर ने कहा- रोमा, क्या मैं देख सकता हूँ कि तुम कैसी लग रही हो उनमें?

मैं शर्माने लगी तो सर ने मेरी टीशर्ट उतार दी और मुझे वही सोफे पर लिटा दिया और मेरे होंटों को चूमने लगे, मेरे चूचे दबाने लगे। काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे को चूमते रहे, मुझे बहुत मजा आ रहा था।

फिर सर उठे और मेरी जींस का बटन खोल कर मेरी जींस उतार दी और कहने लगे- रोमा आज तो तुम इस ब्रा और पेंटी में बहुत खूबसूरत लग रही हो !

फिर सर ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और अपने कमरे में ले गए, मुझे बेड पर बिठा दिया।

फिर उन्होंने अपने लोअर को थोड़ा नीचे सरका कर अपना लंड निकाल कर मेरे होंटों से लगा दिया और कहने लगे- लो रोमा, चूसो इसे ! मैं तो उनका लंड देख कर हैरान रह गई, इतना बड़ा और मोटा था वो ! इतना अच्छा लंड देख कर मैंने तो उनके लंड को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

मुझे उनके लण्ड को चूसना बहुत अच्छा लग रहा था, दस मिनट तक मैं सर के लंड को चूसती रही।

फिर उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह से निकाला, मुझे बेड पर लिटा दिया और अपने सारे कपड़े उतार कर मेरे ऊपर आकर मेरे बूब्स दबाने लगे।

मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी।

फिर उन्होंने ब्रा का हुक खोल कर ब्रा को उतार दिया और मेरे निप्प्ल को चूसने लगे और एक हाथ से मेरी चूत को सहलाने लगे।

मैं आ आआ आह ह्ह्ह अह अह उइ उइ करके सिसकारने लगी।

फिर वो बूब्स को चूमते हुए नीचे आने लगे और पेंटी के ऊपर से मेरी चूत को चूमने लगे और अपने दोनों हाथों से मेरे बूब्स दबाने लगे। मैं कहने लगी- सर, थोड़ा धीरे धीरे दबाओ !

तो उन्होंने कहा- रोमा, तुम मुझे सर मत कहो, मुझे तुम मयंक ही कहो।

मैंने कहा- ठीक है !

फिर उन्होंने मेरी पेंटी भी उतार दी और चूत को पागलों की तरह चूसने लगे और मेरी सीत्कारों से सारा कमरा गूंजने लगा।

मैं भी उनके सर को अपनी चूत में दबा रही थी, मुझे बहुत मजा आ रहा था।

फिर उन्होंने लंड को मेरे मुंह में दल दिया, मैं लंड को चूसने लगी।

और फिर कुछ देर के बाद सर ने कहा- रोमा, क्या अब मैं अपना लंड तुम्हारी चूत में डाल दूँ?

मैं कहने लगी- हाँ मयंक ! डाल दो ! अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा !

तो उन्होंने लंड को मेरी चूत पर रखा और लंड से मेरी चूत को सहलाने लगे, फिर धक्का लगाया पर लंड अन्दर नहीं गया तो उन्होंने एक और जोर का धक्का मारा तो उनका आधा लंड मेरी चूत के अन्दर चला गया और मेरी चीख निकल गई, मैं कहने लगी- मयंक निकालो अपने लंड को बाहर ! मुझे बहुत दर्द हो रहा है।

तो वो कहने लगे- थोड़ा तो दर्द होगा रोमा !

और वो मेरे ऊपर लेट कर मेरे होंटों को चूमने लगे।

फिर सर ने एक और जोर का धक्का मेरे तो उन का पूरा लिंग मेरी फ़ुद्दी में चला गया और वो अपने लंड को चूत के अन्दर आगे पीछे करते हुए मुझे चोदने लगे और दोनों हाथों से मेरे बूब्स को भी दबाने लगे।

मेरे मुँह से आ आआ आआऊ ऊऊ ऊईई ईई ईईइ आ आह्ह्ह ह्ह्ह की आवाजें निकलना और तेज हो गई, मुझे और मजा आने लगा, मैं कहने लगी- मयंक, और जोर जोर से चोदो ! मुझे बहुत मजा आ रहा है।

यह सुनते ही सर ने उनकी स्पीड और बढ़ा दी।

इतने में मैं झड़ गई पर सर अभी भी पूरे जोश में थे और मुझे चोदे जा रहे थे।

फिर वो कहने लगे- रोमा, मैं भी झड़ने वाला हूँ।

और उन्होंने अपना सारा माल मेरी चूत के ऊपर छोड़ दिया और मेरे ऊपर ही लेट गये।

काफी देर तक हम वैसे ही पड़े रहे, फिर मैं उठ कर बाथरूम में चली गई और अपने आप को साफ करने लगी।

तभी सर फिर पीछे से आकर मेरे बूब्स दबाने लगे और अपने लंड को मेरी गांड से लगा दिया और कहने लगे- चलो रोमा, आज मैं तुम को नहलाता हूँ।

और उन्होंने शॉवर चालू कर दिया, वो मेरे बूब्स पर साबुन लगाने लगे और बूब्स को जोर जोर से दबाने लगे। फिर उन्होंने साबुन मेरी चूत पर लगाया और उसे भी सहलाने लगे।

मैं फिर से गरम हो गईम सर का लंड भी फिर से खड़ा हो गया था तो मैं नीचे बैठ कर उनके लंड को चूसने लगी।

फिर सर ने मुझे वहीं बाथरूम के फर्श पर लिटा दिया और मेरी चूत को चूसने लगे।

मैं फिर सिसकारिया भरने लगी, कुछ देर बाद सर ने लंड को मेरी चूत पर रखा और मुझे फिर चोदना चालू किया।

मैं भी पूरे मजे के साथ चुद रही थी। सर कहने लगे- रोमा, मैं फ़िर से झड़ने वाला हूँ।

और वो झड़ गये। फिर हम साथ साथ नहार और मैं अपने कपड़े पहन कर अपने घर आ गई।

तो दोस्तो, यह थी मेरी मयंक सर के साथ की चुदाई !

उम्मीद करती हूँ कि आपको पसंद आयेगी।

तो आप मुझे मेल करके जरूर बताइयेगा।

रोमा
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मेरी पत्नी की बहनें (Meri Patni Ki Behne Part 3) Hindi Sex Story

Written By Jal Pari on Saturday, 30 March 2013 | 18:01


`प्रेषक : मयंक अग्रवाल

मैं मोनिका को चोदता रहा। थोड़ी देर में मोनिका के चूत से पानी निकलने लगा। मेरे लंड ने भी पानी छोड़ देने का सिगनल दे दिया,

मैंने मोनिका से कहा- बोल कहाँ गिरा दूँ माल?

वो बोली- मेरे मुँह में।

मैंने अपने लंड को उसके चूत से निकाला और अभी उसके मुँह में भी नहीं डाला था कि मेरे लंड ने माल छोड़ना चालू कर दिया। इस वजह से मेरे लंड का आधा माल उसके मुँह में और आधा माल उसके गाल और चूची पर गिर गया। फिर भी वो प्यासी कुतिया की तरह मेरा लंड चूसती रही।

उसने अन्नू को अपनी चूची दिखाई और कहा- अन्नू, ले माल को चाट ! मज़ा आएगा।

अन्नू ने बिना देर किये मोनिका की चूची को चाटना शुरू कर दिया और उस पर गिरे मेरे माल को चाट चाट कर खत्म कर दिया।

मुझे काफी मज़ा आ रहा था लेकिन मैंने गौर किया कि अन्नू भी काफी अंगड़ाई ले रही थी, इसका मतलब कि अब उसकी चूत में भी खुजली हो रही थी।

मैंने मोनिका को कहा- अब तेरी छोटी बहन की बारी है। देख तो कैसा अकड़ रही है?

मोनिका अपनी चूत को साफ़ करती हुई बोली- इसकी तड़प को रोकने का एक ही उपाय यह है कि इसे भी अभी चोद दीजिये। क्यों री अन्नू? चुदवायेगी ना? बहुत मज़ा आएगा।

अन्नू बोली- लेकिन दीदी, तू तो अभी कराह रही थी, लग रहा था कि तुझे काफी दर्द हो रहा था।

मोनिका- अरी पगली, वो दर्द नहीं ..मज़ा था री ! तू भी चुदवा कर देख ना !

अन्नू ने कहा- लेकिन दीदी तूने ही तो एक दिन कहा था कि चूत पर पहला हक पति का होता है?

मोनिका- धत पगली ! साली के चूत पर पहला हक तो जीजा का ही होता है न। चल अब ये सब छोड़ और लेट जा ! देख जीजू अभी तुझे जन्नत की सैर करायेंगे।

अब मैंने अन्नू को अपने नीचे लिटाया और उसकी चूचियाँ दबाने लगा। मुझे पता था कि यह लड़की अभी गरम है। इसे काबू में करना कोई मुश्किल काम नहीं है। मैं उसकी चूची को दबाने लगा, वो कुछ नहीं बोल रही थी सिर्फ मुस्कुरा रही थी।

मैं एक हाथ उसकी चूत पर हाथ ले गया।

ओह ! उसकी चूत तो बिल्कुल गीली थी। मैंने अब कोई तकल्लुफ नहीं किया अब वो पूरी तरह से मेरी गिरफ्त में थी। मैं उसके होठों को बेतहाशा चूमने लगा। अब वो भी मुझे जोरदार तरीके से मेरे होठों को चूमने लगी। अब वो मेरा साथ देने लगी थी। वो भी मोनिका की चुदाई देख कर मस्त हो चुकी थी। उसकी चूचियाँ तो मोनिका से भी नरम थी। आखिर उसकी चूत का भी मैंने उद्धार किया और उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया।

लेकिन जैसे ही मैंने डाला, वो चीखने लगी। उसकी चूत का छेद अभी छोटा था।

मोनिका ने कहा- एक मिनट जीजू ! यह क्रीम इसकी चूत में लगा लीजिये, तब चोदिये, तब इसे दर्द नहीं होगा।

मैंने अन्नू के चूत से अपना लंड निकाल लिया, मोनिका ने वैसलिन क्रीम को अन्नू की चूत पर अच्छी तरह से मला। अन्नू चुपचाप अपने चूत पर वैसलिन लगवा रही थी।

मैंने अन्नू की चूची को दबाते हुए कहा- मोनिका, तूने तो अपनी चूत पर वैसलिन नहीं लगाई थी?

मोनिका ने कहा- मुझे तो मोटे बैंगन अपने चूत में डालने की आदत है ना ! यह अन्नू की बच्ची तो सिर्फ मोमबत्ती ही डालती है अपनी प्यारी सी चूत में। इसलिए आपका मोटा लंड इसे चुभ रहा है लेकिन अब नहीं चुभेगा। मैंने वैसलिन लगा दी है इसकी चूत में, अब आप इसकी चूत में अपना लंड बेहिचक डालिए।

मैंने फिर से अन्नू के चूत में अपना लंड धीरे धीरे डालना शुरू किया, इस बार भी वो थोड़ी चीखी लेकिन जल्दी ही अपने आप पर काबू पा लिया।

4-5 झटकों में ही उसकी भी झिल्ली फट गई और उसकी चूत से खून निकलने लगा लेकिन मैंने लंड के धक्के से उसकी चुदाई जारी रखी। थोड़ी देर में ही उसकी चूत भी खुल गई, वो भी अपनी दीदी की तरह जोश में आ गई, उसने अपने दोनों हाथों से मेरी गर्दन को लपेट लिया और मेरे होठों को चूमने लगी।

उसकी जम कर चुदाई के बाद मेरे लंड से भरपूर माल निकला जो कि उसकी चूत में ही समा गया।

मैं अपना लंड उसकी चूत से निकाल कर उसकी बगल में लेट गया।

तब मोनिका ने अन्नू की चूची को दबा कर बोली- क्यों बहना, मज़ा आया ना?

अन्नू ने कहा- हाँ दीदी ! एक बार फिर करो ना जीजू?

मोनिका ने कहा- नहीं, पहले मेरी चूत में भी रस डालिए तब अन्नू की बारी !

मोनिका मेरे बगल में लेट कर अपने दोनों टांगो को आजु-बाजू फैला कर अपनी चूत मेरे सामने पेश कर मुझे न्योता देने लगी।

मेरा लंड अभी थका नहीं था। मैं तीसरी बार चूत चोदने के लिए तैयार था। मैंने उसकी टांगों को अपने कंधे पर रखा और एक ही झटके में अपना लंड उसके चूत में प्रवेश करा दिया।

मोनिका- हाय राम ! जीजू कितना हरामी है रे तू? धीरे धीरे डाल न..

मैंने कहा- देख कुतिया, अभी मैं तेरी कैसी चुदाई करूंगा कि इस जन्म में दोबारा चुदाई का नाम ना लेगी तू।

मेरी बात सुन कर मोनिका ने हँसते हुए कहा- जा रे हिजड़े, तेरे जैसे दस लंड को मैं अपनी चूत में एक साथ डाल लूं तो भी मेरी चूत को कुछ नहीं होने वाला।

मैंने भी हँसते हुए कहा- तो ये ले.. सभाल इसे।

कह कर मैं काफी जोर जोर से उसके चूत में अपना लंड आगे पीछे करने लगा। पहले तो वो सिर्फ अपने होंठों को दांतों में दबा कर दर्द बर्दाश्त करती रही लेकिन थोड़ी देर में ही उसकी चीखें निकलने लगी, वो हल्के स्वर में चिल्लाते हुए कहने लगी- हाय रे ! मादरचोद, फाड़ डाला रे, साले जीजू, कुत्ता है तू ! एक नम्बर का रंडीबाज है। आदमी का लंड है या गधे का लंड। साले कुछ तो रहम कर मेरी नाजुक चूत पर !

मुझे उसकी गालियाँ काफी प्यारी लग रही थी। उसकी गालियाँ मेरा जोश बढ़ा रही थी। मैं जानता था कि उसे काफी मज़ा आ रहा है क्योंकि इतने दर्द होने के बावजूद वो अपनी चूत से मेरा लंड निकालने का प्रयास नहीं कर रही थी।

इस बार मैंने मोनिका के चूत को घमासान तरीके से 20 मिनट तक चोदा। इस घमासान चुदाई के बाद मेरे लंड से लावा फ़ूट पड़ा और सारा लावा उसके चूत में ही गिराया।

मोनिका की हालत देखने लायक थी। वो इतनी पस्त हो चुकी थी कि बिना कोई करवट लिए जैसे की तैसी लेटी लेटी ही सो गई।

मोनिका तो थक कर सो गई लेकिन अब अन्नू कहने लगी- मेरे मुंह में भी रस पिलाइये जैसे दीदी को पिलाया था। और मेरी भी चूत चूसिये जैसे आपने दीदी की चूसी थी।

मेरी भी तो अब हिम्मत नहीं हो रही थी। लेकिन मैं यह लोभ छोड़ना भी नहीं चाहता था और अन्नू को दुखी भी नहीं करना चाहता था।

मैंने कहा- अन्नू, यह मेरा लंड आपके हवाले है। आप इसे चूस कर इससे रस निकाल लीजिये।

अन्नू बोली- ठीक है।

मैं बिस्तर पर लेट गया। अन्नू मेरे बदन पर इस तरह से लेट गई कि उसकी चूत मेरी मुँह के ऊपर और वो मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और मैं उधर उसकी चूत को चूस रहा था। जवान लड़कियों में रस की कमी नहीं रहती। उसकी चूत से लगातार रस निकल रहा था। सचमुच अद्भुत स्वाद था।

उधर मेरा लंड फिर तनतना गया, उसके चूसने का अंदाजा भी निराला था। मैंने उसे फिर से सीधा लिटाया और उसकी दोनों टांगों को अपने कन्धों पर रखा। उसकी चूत को दोनों हाथ से सहलाने के बाद अपना लंड पकड़ कर उसके चूत में डाला लेकिन मैं अन्नू को बड़े ही प्यार से धीरे धीरे चोदता रहा। वो मेरे इसी अंदाज़ पर मज़े ले रही थी। इस बार काफी देर तक उसकी चूत की चुदाई करने के बाद मेरे लंड ने चौथी बार क्रीम निकालने का सिगनल दिया।

मैंने करहाते हुए अन्नू से पूछा- माल पीना है या डाल दूँ चूत में ही?

अन्नू ने भी दर्द भरे स्वर में कहा- मुझे पीना है।

मैंने जल्दी से लंड को उसकी चूत से निकाला और अन्नू के मुँह को खोल कर उसके मुँह के पास लंड ले जा कर हाथ से 3-4 बार मुठ मारा ही था कि मेरे लंड महाराज ने चौथी बार लावा निकाल दिया।

सारा लावा अन्नू ने अपने मुँह में गटक लिया और बड़े ही चटखारे ले ले कर पिया। आखिर उसकी चूत से भी रस निकल गया जो सचमुच किसी जूस से कम नहीं था।

उसके बाद मैं भी अन्नू के साथ ही उसी के बिस्तर पर ही सो गया। रात करीब दस बजे हम लोग उठे मोनिका और अन्नू दोनों ही चल नहीं पा रही थी। मैं खाने के लिए बाहर गया और उन दोनों के लिए भी भरपूर मात्रा में खाना पैक करवाया और दो बोतल बियर और एक पैकेट सिगरेट ले लिया।

वापस आने पर उन दोनों को 2-2 गिलास बियर पिला कए खाना खिलाया। पहले तो दोनों मना करती रही। लेकिन जब मैंने कहा कि इससे कोई हानि नहीं होगी बल्कि तुम दोनों का बदन और चूत दर्द ठीक हो जाएगा तब दोनों ने बियर को पीया। फिर दोनों को एक एक सिगरेट भी पीने को दिया। पहले तो वो दोनों सिगरेट में भी ना ना करती रही लेकिन जब मैं सिगरेट पी रहा था और एक कश लेने के लिए अन्नू को दिया तो वो छोटी छोटी कश लेकर समूची सिगरेट ही पी गई। उसकी देखा देखी मोनिका भी एक सिगरेट छोटी छोटी कशों में पूरी पी गई। इस से सचमुच उन दोनों का दर्द समाप्त हो गया। शेष एक बोतल बियर और 3 सिगरेट मैं अकेले ही पी गया। हम सभी इतने में फिर से मस्त हो चुके थे। इसके बाद हम तीनों में कोई पर्दा नहीं रह गया, हम तीनों नंगे होकर रात भर सेक्स गेम खेलते रहे।

उसी रात को मैंने दोनों की गांड का भी उद्धार कर दिया। हम तीनो सुबह के सात बजे सोये। मैंने अपने लिए अलग कमरा को भी रखे रखा। जहाँ मैं कभी कभी दोनों में से किसी एक को अपने कमरे में ले जाकर एकांत में भी चोदता था।कभी कभी एकांत में भी तो चुदाई होनी चाहिए ना !

शेष सातों दिन हम तीनों ने साथ मिल कर चुदाई का तरह तरह का खेल खेला।

घर वापस आने के बाद भी चुपके चुपके हम तीनों रंगरेलियाँ मना ही डालते हैं।

तो देवियों और सज्जनों आपको मेरी और मेरी सालियों की रासलीला कैसी लगी? मुझे मेल करके बताएँ।



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